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पोवारों के इतिहास के पन्ने ही पोवार समाज को सुधारों का संदेश देते है ! : लेखक – इतिहासकार प्राचार्य ओ सी पटले

पोवारों के इतिहास के पन्ने पोवार समाज को सुधारों का संदेश देते है !

लेखक – इतिहासकार प्राचार्य ओ सी पटले

🔷  इतिहास केवल घटनाओं का नहीं बल्कि प्रेरणा का विषय है। इतिहास हमें अच्छे जीवन की प्रेरणा एवं अतीत में हुई गलतियों से सबक लेने के अवसर भी प्रदान करता है।
🔷  आज़ादी के पहले पोवार समाज अपने सुदूर अतीत के संबंध में बहुत कुछ अनजान था। लेकिन आज़ादी के पश्चात शिक्षा के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं संसूचन के भरपूर साधनों की उपलब्धता के कारण समाज को अपने गौरवशाली इतिहास की विपुल जानकारी प्राप्त हुई।
🔷 अब पोवार समाज अपना संबंध सम्राट विक्रमादित्य एवं चक्रवर्ती महाराजा भोज से जोड़ते हुए तथा इस पर निशदिन गर्व अभिव्यक्त करता हुआ प्रतीत होता है।

♦️ १. गौरवशाली इतिहास
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पोवारों के इतिहास के पन्नों के अनुशीलन से हमें उनके क्षत्रिय वंश, पोवार जाति, मातृभाषा पोवारी, सनातन हिन्दू धर्म पर अधिष्ठित संस्कृति, राष्ट्र के प्रति निष्ठा का सातत्य आदि. जानकारी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होती है। इससे स्पष्ट होता है कि इस समाज का इतिहास गौरवशाली है। इसी परिप्रेक्ष्य में पोवार समुदाय का प्रबुद्ध वर्ग आज अपने पर गर्व प्रदर्शित करता हुआ दिखाई देता है।

♦️ २. सामाजिक चरित्र का महत्व
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अपने अतीत के प्रति स्वाभिमान एवं गर्व होना बहुत अच्छी बात है। लेकिन गर्व एवं चरित्र की तुलना में चरित्र अधिक महत्वपूर्ण है। क्योंकि चरित्र की आधारशिला पर ही गर्व टिका हुआ रह सकता है। चरित्र में बल न हो तो गर्व उपहास का पात्र एवं धराशाई बन जाता है।

♦️ ३.प्रबुद्ध वर्ग का दायित्व
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सामान्य लोगों में न तो अपने गौरवशाली इतिहास का पूरा ज्ञान होता है, न समाज के चरित्र पर सोचने की योग्यता एवं उसमें सुधार करने का समय होता है।
सामान्य लोग अक्सर अपनी निजी जिंदगी में ही उलझे हुए होते है। सामाजिक संगठनों में भी राजनीति प्रविष्ट हो जाती है। इसलिए वें भी समाज के प्रति अपने दायित्व का सही निर्वाह करने में विफल होते हुए दिखाई देते है।
उपरोक्त स्थिति में समाज निर्माण का दायित्व सामाजिक संगठनों के साथ -साथ समाज के प्रबुद्ध वर्ग पर भ होता है। प्रबुद्ध वर्ग में शिक्षक, प्रध्यापक, वकील, डाॅक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी, उन्नत किसान, उद्योजक, पत्रकार आदि. का समावेश होता है। ये लोग जिस समाज से उभरकर सामने आये है, उस समाज को उबारने का निश्चित ही इनका दायित्व बनता है।
♦️४. प्रमुख सामाजिक दायित्व
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👉 ४-१. ऐतिहासिक पहचान का संरक्षण
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पोवार समाज का ऐतिहासिक नाम पोवार है एवं समाज की मातृभाषा का नाम पोवारी है। समाज के कुछ लोग सुधार की दृष्टि से इन नामों के स्थान पर पंवार तथा पंवारी यह नाम प्रतिस्थापित करने के लिए प्रयत्नशील है। दूसरी ओर पोवार समाज का स्वतंत्र अस्तित्व नष्ट करने के लिए कुछ लोग पवार एवं पवारी यह नाम प्रतिस्थापित करने का षड़यंत्र कर रहे है।
समाज की ऐतिहासिक पहचान नष्ट होने से समाज में बिखराव आयेगा एवं भविष्य में धीरे-धीरे यह समाज अपनी स्वतंत्र गौरवशाली पहचान गंवा देयेगा। समाज की स्थिति ” धोबी का कुत्ता, न घर का ना घाट का जैसी” हो जायेगी।

👉 ४-२. मातृभाषा पोवारी का उत्थान
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मातृभाषा यह समाज की संस्कृति, एकता एवं भाईचारे की रीढ़ है। इसके बिना ये सब शक्तिहीन होकर मजबूती से खड़े रहना असंभव हो जायेगा । मातृभाषा के बिना इन तीनों तत्वों की ताज़गी नष्ट हो जायेगी ये तत्व सुखे वृक्ष के तने समान प्राणहीन हो जायेंगे।
प्रिय बुद्धिजीवियों! आप तो हिन्दी, मराठी, अंग्रेजी आदि. भाषाएं बोल लोगे। आपका जीवन कहीं रुकेगा नहीं। लेकिन समाज के सामान्य लोग जो मातृभाषा पर प्रेम करते है और परिवार में मातृभाषा बोलते है, उनके जीवन पर आपके बदलाव का गंभीर असर अवश्य पड़ेगा। वें मातृभाषा के अस्तित्व के प्रति चिंतित हो जायेंगे। समाज में मातृभाषा बोलने वाले और मातृभाषा की उपेक्षा करनेवाले ऐसे दो वर्ग उत्पन्न हो जायेंगे।
इसलिए समस्त बुद्धिजीवियों! आपसे अनुरोध है कि समाज, संस्कृति एवं सामाजिक भाईचारे के खातिर,आप मातृभाषा के साथ जुड़े रहिए। मातृभाषा को
बोलचाल में स्थान देते हुए, जीवन में उंची बुलंदियां भी हासिल कीजिए।
आप यदि समाज की कल्याण कामना से मातृभाषा के उत्थान के लिए प्रयत्नशील हो जायेंगे तो इतना अवश्य है कि समाज में पोवारी के साहित्यिक उत्पन्न होंगे। पोवारी साहित्य में बहार आयेगी, समाज प्राणवान बनेगा, फलेगा – फूलेगा और गौरवान्वित भी होगा।

👉 ४-३. सनातन हिन्दू धर्म के प्रति दायित्व
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क्षत्रिय पोवारों की उत्पत्ति ही सनातन हिन्दू धर्म एवं भारतमाता की रक्षा के लिए हुई है। अनेक अग्निवंशियों ने मुस्लिम आक्रांताओं के जुल्मों के आगे नतमस्तक होकर इस्लाम कबुल कर लिया। लेकिन मेरे स्वजनों! बुद्धिजीवियों! हमारे पूर्वजों ने अपने धर्म, संस्कृति एवं भाषा के साथ कभी गद्दारी नहीं की। वें इन तीनों तत्वों का जतन किए है एवं विरासत में आपकों सौंपें है। इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप तन – मन -धन से सनातन हिन्दू धर्म के प्रति निष्ठावान बने रहकर इसके उत्थान के लिए सदैव प्रयत्नशील रहिये। सनातन हिन्दू धर्म एवं उसके संस्कारों में ही समाज एवं नई पीढ़ी का शाश्वत कल्याण निहित है।
👉४-४. संस्कृति,संस्कार एवं वैचारिक उत्थान
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हमारे समाज के प्रिय कर्णधारों! आप ध्यान से सुनियेगा। आप जिसे संस्कृति कहते है और बड़े गौरव के साथ पोवार समाज को उसकी संस्कृति के संरक्षण का आश्वासन बार -बार दिया करते है तथा उसका समर्थन पाकर अपने नेतृत्व की जड़ें मजबूत बना लेते है,‌ उस संस्कृति को समाज की ऐतिहासिक पहचान, मातृभाषा एवं सनातन हिन्दू धर्म का अधिष्ठान प्राप्त है।
इसलिए आप जब- जब एक ओर समाज की संस्कृति के संरक्षण का ढिंढोरा पीटते हैं लेकिन दूसरी ओर उसकी ऐतिहासिक पहचान, मातृभाषा एवं सनातन हिन्दू धर्म को दुर्लक्षित -उपेक्षित करते रहते है, तब-तब आप अपने भोले-भाले समाज को धोखा देते रहते है।

♦️ ५. शाश्वत कल्याण
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पोवार समाज के स्वतंत्र अस्तित्व में ही उसका शाश्वत कल्याण निहित है। अतः सामाजिक संगठनों एवं प्रबुद्ध वर्ग द्वारा समाज के स्वतंत्र अस्तित्व की रक्षा तथा स्वर्णिम भविष्य का सपना साकार करने के लिए उसकी ऐतिहासिक पहचान का जतन, मातृभाषा पोवारी का उन्नयन, सनातन हिन्दू संस्कृति का उत्कर्ष, भारतमाता का कल्याण इन लक्ष्यों को अहमियत देते हुए पोवार समाज का सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, वैचारिक आर्थिक और सर्वांगीण विकास का प्रयास किया जाना चाहिए।

ओ सी पटले
पोवार समाज रिसर्च अकॅडमि, भारतवर्ष.
गुरु.११/१/२०२४.
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