अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस को परिप्रेक्ष्य मा – सामाजिक प्रतिष्ठा ला घातक पोवारी गीतों पर सामाजिक अंकुश अनिवार्य…!

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♦️मन मा जसो आयेव तसो गाना बनाय लेनो अथवा कथा – कहानी लिख देनो येला साहित्य कव्हनो गलत से.

♦️ साहित्य मा लेखक व समाज की सोच को स्तर ध्वनित होसे. निम्नस्तरीय पोवारी साहित्य को सृजन लक गायक, लेखक, मातभाषा व पूरों समाज हासी को पात्र बन जासे.
♦️ अतः लेखक न् सुंदर व नाविन्यपूर्ण रचना साकार करन को उद्देश्य सामने ठेयके लेखन करनो आवश्यक से.
♦️ पोवार समाज को प्रत्येक लेखक व गायक न् साहित्य को माध्यम लक मातृभाषा व समाज को एक व्यवस्थित चित्र व चरित्र संसार को सामने जाये, येको भान ठेवनों आवश्यक से.

१. साहित्य को उद्देश्य :- केवल मनोरंजन येव साहित्य को उद्देश्य नोहोय. साहित्य को माध्यम लक समाज मा संस्कारों को बीजारोपण होये पाहिजे व समाज ला सही दिशा देन को कार्य भी संपन्न होनो आवश्यक से.
२. साहित्यिक व कलाकारों को दायित्व :- साहित्यिक व कलाकार ये समाज का महत्वपूर्ण अंग आत व समाज की नवी पीढ़ी ला संस्कारित करनों व सही दिशा देनो समाज की जिम्मेदारी से। या वास्तविकता ध्यान मा ठेयके साहित्यिक व कलाकारों न् आपली भूमिका सुनिश्चित करके कार्य करनो आवश्यक से.
३. पोवारी साहित्य को अवलोकन :- पोवार समाज मा १९०५ पासून सामाजिक संगठन अस्तित्व मा सेत. समाज को कर्णधारों न् साहित्य को माध्यम लक समाज ला सही दिशा देन को कार्य सतत करी सेन. येको कारण अज पोवार समाज उत्तम स्थिति मा से.
परंतु भारत की आज़ादी को पश्चात पोवारी भाषा मा अश्लील, हास्यास्पद व समाज की प्रतिष्ठा ला घातक काही साहित्य की निर्मिति भयी ।‌असो साहित्य का प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित सेत –
(१) पोवार की टूरी ( कॅसेट)
(२) पटील की टूरी पराय गयी (कॅसेट)
(३)बाई मोरों नवरा जमादार से
(४)बाई मोरों कमर मा दुख् से
(५)आओ ना समधि दार भात खाबी
४. भोजपुरी भाषा पर एक दृष्टिक्षेप :- वर्तमान समय मा भोजपुरी भाषा या अत्यंत तेज गति लक विकसित होय रही से. भोजपुरी ला भारतीय संविधान की अनुसूचित भाषाओं की आठवीं सूची मा
समाविष्ट करन की मांग भी उठ रही से.
भोजपुरी भाषा आवश्य विकसित होय रही से. लेकिन भोजपुरी आर्केस्ट्रा मा अश्लीलता की बाढ़ आय गयी से. समाजहित चिंतकों द्वारा येन् अश्लीलता पर सार्वजनिक रुप लक प्रश्न उठ रह्या सेती. पोवारी भाषा को गलत दिशा लक
संरक्षण करनों बहुत आवश्यक से.
५. सामाजिक अंकुश की आवश्यकता :- पोवारी भाषा ला विकसित करनों येव आमरों महत्वपूर्ण लक्ष्य से. आमला बहुत तेज गति लक आपली मातृभाषा ला विकसित करनों से. येको साती २०१८ पासून आमरा साहित्यिक व कलाकार भी पूर्ण उल्लास लक प्रयत्नशील सेती. लेकिन पोवारी भाषा ला सही दिशा मा विकसित करनों से, येको भान भी आमला से.
पोवारी भाषा व समाज को सही विकास करनों येव आमरों प्रबुद्ध वर्ग व सामाजिक संगठनों को नैतिक दायित्व से. अतः समाज की प्रतिष्ठा कलंकित करेती असो आडियो, व्हिडिओ व पोवारी कार्टून पर सामाजिक अंकुश लगावनो या वर्तमान युग की प्रमुख आवश्यकता से.
– ओ सी पटले
पोवारी भाषाविश्व नवी क्रांति अभियान, भारतवर्ष.
मंग.२०/२/२०२४.
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