पोवारों के स्थानांतरण के संबंध में रेज़ीडेन्ट जेनकिन्स के कथन का एक आलोचनात्मक अध्ययन -इतिहासकार प्राचार्य ओ सी पटले

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पोवारों के स्थानांतरण के संबंध में रेज़ीडेन्ट जेनकिन्स के कथन का एक आलोचनात्मक अध्ययन
-इतिहासकार प्राचार्य ओ सी पटले
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♦️पोवार समाज गोंडवाना के वैनगंंगा अंचल में बसा हुआ है। यह समाज सवा तीन सौ वर्ष पूर्व से मालवांचल से स्थानांतरित होकर वैनगंंगा अंचल में स्थाई रुप से बस गया है।
♦️मालवांचल के पोवार क्यों और कब वैनगंंगा अंचल में स्थानांतरित हुए? इसे लिखित तथ्यो एवं समकालीन घटनाओं के आधार पर परिभाषित करना, यह इस लेख का प्रमुख उद्देश्य है।
1. रेज़ीडेन्ट जेनकिन्स का कथन
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वैनगंगा अंचल के पोवारों के स्थानांतरण का उल्लेख सबसे पहले रेज़ीडेन्ट जेनकिन्स ने राजा के अधीन प्रदेश नामक ग्रंथ(1827) में किया है। इसमें उसने लिखा हैं – पोवार समुदाय के लोग कहते हैं कि उनके पूर्वजों को मालवा से निष्कासित किया गया।( संदर्भ – Powars were settled in the districts on the Wynegunga during the reign of Bukht Booland .They say their ancestors were expelled from Dhar, in Malva, in the reign of Aurangzeb.(संदर्भ- Report on the territories on the Raja of Nagpur, Richard Jenkins, 1827, P.36.)
2.एम. ए. शेरिंग का कथन
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परंतु एम.ए. शेरिंग ने पोवारों के स्थानांतरण के संबंध में लिखा है – “Powars of Malwa, quited their country in the reign of the Emperor Aurungzebe. “(संदर्भ-
1 संदर्भ – Hindu Tribes and Castes, Volume ll- M.A.Sherring,1879, P.93.)
3. जेनकिन्स एवं शेरिंग के कथन में निहित भेद
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एम. ए. शेरिंग ने पोवारों के स्थानांतरण के संबंध में लिखा है-” मालवा के पोवार औरंगजेब के शासनकाल में अपना प्रदेश छोड़ के चले गये। “(quited their country)
‌इसके विपरीत रेज़ीडेन्ट जेनकिन्स ने उनके स्थानांतरण के संबंध में ‌लिखा है-” वें धार से खदेड़े गये।” (They were expelled from Dhar)
“प्रदेश छोड़ना”और “प्रदेश से खदेड़े जाना” इन दोनों कथनों के अर्थ में
आकाश- पाताल का अंतर है। प्रदेश छोड़ने (quited = to depart from, leave)का अभिप्राय ” अपनी इच्छा से अपना प्रदेश छोड़कर दूसरे प्रदेश में जाना” होता है। लेकिन खदेड़ना ( expelled= driven out, forced away) का अभिप्राय ” बलपूर्वक बाहर निकालना अथवा निष्कासित करना” होता है।
रेज़ीडेन्ट जेनकिन्स एक कट्टर साम्राज्यवादी था एवं उसका कथन एक विशेष समुदाय के मान – सम्मान के साथ जुड़ा हुआ है। इसलिए उसके कथन की नि:ष्पक्ष समीक्षा करने के पश्चात ही स्वीकार अथवा अस्वीकार्य करना उचित होगा।
4. जेनकिन्स के कथन की समीक्षा
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पोवारों के स्थानांतरण के संबंध में रेज़ीडेंट जेनकिन्स ने लिखा है- पोवार लोग बताते हैं कि ” औरंगजेब के शासनकाल में उनके पूर्वजों को मालवा के धार से निष्कासित किया गया।” (They say their ancestors were expelled from Dhar, in Malva, in the region of Aurangzeb.)
उपरोक्त कथन का आलोचनात्मक विश्लेषण निम्नलिखित है –
(1)रेज़ीडेंट जेनकिन्स के अनुसार पोवार समुदाय के लोग बख्त-बुलंद के शासनकाल में मालवा से आकर वैनगंगा अंचल में बसे है। उसका यह कथन अन्य उपलब्ध तथ्यों के आलोक में सत्य प्रतीत होता है।
(2)रेज़ीडेंट जेनकिन्स का दूसरा कथन है कि पोवारों को मालवा से निष्कासित किया गया। जेनकिन्स के इस कथन के दो मुख्य कमजोर बिंदु है। प्रथम, यह कथन पूंछताछ करके प्राप्त की गई जानकारी अथवा पोवारों द्वारा कहीं गयी बात पर आधारित है। प्राथमिक स्त्रोत पर आधारित नहीं है। द्वितीय, पोवारों को कौनसे ईस्वी सन् में धार से निष्कासित किया गया था? इसका उल्लेख रेज़ीडेंट जेनकिन्स के कथन में नहीं है।
(3) अंग्रेजों द्वारा भारतीयों पर गुलामी थोपी गई थी। इसलिए उनके द्वारा राष्ट्रीय भावना से इतिहास नहीं लिखा जाता था। इतिहास के माध्यम से भारतीय लोगों में हीन भावना (Inferiority Complex) उत्पन्न करना यह उनका एक प्रमुख उद्देश्य हुआ करता
था। अंग्रेजों द्वारा लिखा गया भारतीय इतिहास इस प्रकार के उदाहरणों से भरा पड़ा है। इस ऐतिहासिक पार्श्वभूमी के आधार पर जेनकिन्स द्वारा लिखे गए -“पोवारों को मालवा से निष्कासित किया गया था”, इस कथन को आंखें बंद करके स्वीकार नहीं किया जा सकता।
रिचर्ड जेनकिन्स का ग्रंथ पोवारों के इतिहास का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है। लेकिन यहां उसने पोवारों का स्वाभिमान नष्ट करके उनमें हीन भावना उत्पन्न करने की दृष्टि से अपने वक्तव्य में लेखन चतुराई की हो और पोवारों के निष्कासित करने की मनगढ़ंत बात लिख दी हो, इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता।
5. भारत की समकालीन राजनीति
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पोवारों का स्थानांतरण लगभग 1700 में हुआ।इस स्थानांतरण की समकालीन राजनीतिक परिस्थिति के आधार पर ही उसके कारण एवं समय को परिभाषित किया जा सकता है।
(1) इस समय भारत में सम्राट औरंगजेब का शासन था तथा यह एक जुल्मी तथा अत्याचारी शासक था।
(2) दक्षिण में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा प्रस्थापित मराठा राज्य था।
(3) छत्रसाल बुंदेला बहुत शौर्यशाली एवं छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वराज्य स्थापना के प्रयासों से प्रभावित था। उसने बुंदेलखंड को औरंगजेब की अधीनता से मुक्त कराके वहां 1678 अपना राज्य स्थापित कर लिया था। उसने मालवा के लोगों की इच्छा से 1699 में औरंगजेब की अधीनता से मालवा को मुक्त कराया और वहां अपनी सत्ता प्रस्थापित कर ली।
6.देवगढ़ का शासक बख्त बुलंद
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उस समय देवगढ़ नामक एक राज्य था। यहां (1668 से 1706 तक) बख्त बुलंदशहा का शासन था। छिंदवाड़ा का देवगढ़ किला यह इसकी राजधानी का स्थान था। बख्त-बुलंद यद्यपि औरंगजेब के अधीन एक राजा था, लेकिन वह छत्रपति शिवाजी महाराज एवं छत्रसाल बुंदेला से प्रेरित था और देवगढ़ को स्वतंत्र करने के लिए प्रयत्नशील था। इसलिए उसका अधिक समय औरंगजेब के खिलाफ आज़ादी की लड़ाई लड़ने में गया।
7.बख्त-बुलंद का पलायन
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बख्त-बुलंद ने 1686 में औरंगजेब के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। इस युद्ध में वह पराजित हुआ और 1898 में भावी योजना के लिए मालवा गया। (संदर्भ -The defeated Bakht Buland leaving his capital moved into Malva.He requested Chattrasal to recruit masketteers for him.-Bhandara District Gazetteer,1978,PP.93-94)
8. सादतखान का आत्मसमर्पण
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‌ बख्त-बुलंद जब मालवा गया तब मुगल सेना ने उसके प्रबल सहकारी सादतखान अफगान पर आत्मसमर्पण के लिए दबाव बनाया। जब सादतखान ने आत्मसमर्पण कर दिया तो बख्त बुलंद की 3700 सैनिक टुकड़ियां मुगलों की सेवा में चली गयी । (संदर्भ -They forced Sadat Khan Afghan, a supporter of Bakht Buland to submit. About 3,700 troops of Bakht Buland came over to the Mughal Service.- Bhandara District Gazetteer,p.174.)
अतः जब बख्त-बुलंद मालवा गया तब गोंडवाना में उसका सैनिक सामर्थ्य समाप्त हो गया।
9. बख्त-बुलंद का देवगढ़ में पदार्पण
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बख्त-बुलंद मालवा जाने के पश्चात उसकी महाराजा छत्रसाल से क्या बातचीत हुई थी, यह इतिहास को अवगत नहीं हैं। बख्त-बुलंद का 1699 का इतिहास अंधकार में छिपा हुआ है। लेकिन 1700 में वह देवगढ़ पहुंच गया और उसके पास भरपूर सेना थी। भंडारा जिला गजे़टीयर में अंकित है कि – एक पोवार राजपूत मालवा से आया था। इ.स.1700 में वह बख्त बुलंद की सेना में 2000 अश्वसेना का नायक था। (The founder of the Mahagaon Zamindari was a Ponwar Rajput who came from Malva and rose to the post of 2000 horse in the service of the Gond Raja Bakht Buland -1700A.D.- Bhandara District Gazetteer p.714.)
10.दर्यापुर का निर्णायक युद्ध
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‌ मार्च 1701 में बख्त-बुलंद एवं मुगल सेना के बीच घमासान युद्ध हुआ। इस युद्ध में बख्त-बुलंद को चोट पहुंची। लेकिन प्राणों की चिंता न करते हुए उसने मुगल सेना का पीछा किया। दर्यापुर ( विदर्भ,जि.अमरावती) में दोनों सेनाओं के बीच तेज लड़ाई (Sharp battle) हुई। बख्त बुलंद के शौर्य के सामने मुगल सेना टिक नहीं पायी एवं उसने स्वराज्य की स्थापना कर ली। वह देवगढ़ का स्वतंत्र शासक बन गया।( Bhandara District Gazetteer, P.94.)
10. रामटेक के पास नगरधन में आगमन
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मालवा के पोवार कुटुंब कबीले सहित सर्वप्रथम रामटेक के समीप नगरधन आये । । वहां से वें अंबागढ़ एवं चांदपुर की तरफ फैले। बाद में उन्होंने धीरे धीरे भंडारा,चांदा और बालाघाट के क्षेत्र में विस्तार किया।( Earliest account speaks of them as settelling at Nagardhan near Ramtek.Hence they spread over Ambagarh and Chandpur and gradually occupied much of Bhandara,Chanda and Balaghat (संदर्भ -Central Provinces District Gazetteer Valume A, Year 1908, Page 101.)
11. निष्कर्ष
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उपर्युक्त संपूर्ण लिखित तथ्य एवं बख्त-बुलंद कालीन घटनाक्रम को सुसंगत
रुप से प्रस्तुत करने के पश्चात हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते है कि पोवारों के स्थानांतरण के संबंध में किया गया विधान सरासर झूठ है। पोवारों का स्थानांतरण 1699-1700 में हुआ। यह स्थानांतरण किसी ने उन्हें निष्कासित करने के कारण नहीं बल्कि उनके स्थानांतरण के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे-
(1) बख्त-बुलंद को सैनिक सहयोग ————————————————
पोवार समाज क्षत्रिय है। युद्ध उनके जीवन का अनिवार्य हिस्सा था। वें बख़्त बुलंद को सैनिक सहयोग करने मालवा से नगरधन पहुंचे। उन्होंने दरियापुर के युद्ध में
बख्त-बुलंद को विजय दिलाई।
(2) महान शासकों की प्रेरणा ——————————————-
पोवार सरदार और सैनिक सैनिक छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराजा छत्रसाल बुंदेला एवं बख्त-बुलंद के स्वराज्य स्थापना के प्रयासों से प्रेरित थे। उन्हें बख्त बुलंदशहा के प्रति उन्हें भावनात्मक लगाव था। इसलिए वें वैनगंगा अंचल में स्थानांतरित हुए।
(3) कृषि क्षेत्र के प्रति आकर्षण ———————————————
युद्ध एवं कृषि उद्योग यह क्षत्रिय पोवारों के उपजीविका के प्रमुख साधन थे। वैनगंंगा अंचल की भूमि का उपजाऊपन भी पोवारों के स्थानांतरण का एक महत्वपूर्ण कारण है।
(4) सेना में अच्छे पदों के प्रति आकर्षण
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बख्त-बुलंद एक योग्य तथा शौर्यशाली शासक था। मालवा के लिए पलायन करते समय उसने अपना सैनिक सामर्थ्य खो दिया था। अतः बख्त-बुलंद के शासन में सेनापति, किलेदार, नायक आदि अच्छे-अच्छे पदों पर नियुक्त होने के भरपूर अवसर उपलब्ध थे। इसलिए पोवारों ने मालवांचल से वैनगंंगा अंचल में स्थानांतरण किया।
(5) विकास की संभावना
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मालवांचल विकसित था, लेकिन वहां जनसंख्या अधिक थी । उसकी तुलना में वैनगंंगा अंचल में जनसंख्या कम,‌कृषि योग्य विपुल भूमि और विकास की भरपूर संभावनाएं थी।
पोवारों के स्थानांतरण के संबंध में यह एक बुनियादी अन्वेषण है । इस अन्वेषण के द्वारा पोवारों के स्थानांतरण का पूर्ण चित्र एवं चरित्र स्पष्ट किया गया है।
– समग्र पोवारी चेतना एवं सामूहिक क्रांति अभियान, भारतवर्ष.
मंग.26/3/2024.
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