पिपरिया ग्राम पंचायत में हुआ लाखों का भ्रष्टाचार

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# उपसरपंच गुणाराम मेहर सहित अन्य सदस्यों ने सरपंच पर लगाया पद का दुरुपयोग करने का आरोप

# पत्रकार वार्ता में दी जानकारी

जिला प्रतिनिधि
माइकल मेश्राम

सालेकसा : तहसील तहत मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से सटे क्षेत्रफल व जनसंख्या की दृष्टि से पूरे आमगांव-देवरी विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़ी ग्राम पंचायत के रूप में चिन्हित पिपरिया ग्राम पंचायत में पदस्थ सरपंच ने पद का दुरुपयोग कर लाखों के वारे-न्यारे किए जाने का मामला प्रकाश में आते ही उपसरपंच गुणाराम मेहर ने अन्य 6 सदस्यों के साथ मिलकर सालेकसा स्थित पत्रकार भवन में पत्रकार वार्ता में पत्रकारों से चर्चा करते हुए इसकी विस्तृत जानकारी पत्रकारों को दी।
पत्रकारों से चर्चा के दरम्यान गुणाराम मेहर ने बताया कि पिपरिया ग्राम पंचायत तहत आनेवाले पिपरिया त.सा.क्र. 07 में लगभग 50 एकड़ जमीन पर छत्तीसगढ़ राज्य से एबीस एक्सपोर्ट (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, आई. बी. कॉरपोरेट हाउस,ग्राम व पोस्ट इंदामारा जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़ द्वारा पोल्ट्री फार्म (मुर्गी पालन केंद्र) का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। जिसका अनापत्ति प्रमाणपत्र (N.O.C.) और ग्रामसभा का ठराव सरपंच द्वारा संबंधित कंपनी को प्रदान किया गया परंतु ना ही ग्राम पंचायत के सदस्यों को विश्वास में लिया गया और ना ही ग्राम की जनता को। इस बात की विस्तार पूर्वक जानकारी भरा शिकायत पत्र गुणाराम मेहर ने मा. विभागिय आयुक्त नागपुर विभाग नागपुर को दिनांक 24/11/2023 को पेश किया है। जिसकी जांच सालेकसा पंचायत विस्तार अधिकारी पराते ने ग्रा.प. में आकर की है। गुणाराम मेहर ने बताया कि संबंधित कंपनी को अनापत्ति प्रमाण पत्र देने के पूर्व महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम 1959 मुंबई के अनुसार जिल्हा स्वास्थ्य अधिकारी,प्रदूषण नियंत्रण मंडल,जिल्हा पशुधन अधिकारी एवं सार्वजनिक बांधकाम विभाग की ओर से प्राप्त अनापत्ति प्रमाणपत्र (N.O.C.) आवेदन के साथ सलंग्नित करना आवश्यक था। ताकि भविष्य में यदि ऊक्त कंपनी का क्षेत्रवासियों पर दुष्परिणाम होता है इसकी जवाबदेही उनकी भी हो। तत्पश्चात उक्त आवेदन के विषय को मासिक सभा में रखकर उसपर चर्चा करना आवश्यक था। उक्त विषय को मासिक सभा में सर्वसम्मति से मंजूर कर उसे ग्राम सभा की विषयसूची में रखना अनिवार्य था तत्पश्चात उसे ग्रामसभा में रखकर उपस्थित सभासदों की रायसुमारी लेकर उसे मंजूरी प्रदान करना अनिवार्य था। लेकिन सरपंच ने ऐसा ना करते हुए दिनांक 26/05/2023 की ग्रामसभा के अहवाल में अध्यक्ष के अनुमति से आनेवाले विषय में दर्शाकर उक्त कंपनी को अनापत्ति प्रमाण पत्र (N.O.C) और ग्रामसभा के ठराव की प्रत दे दिया। जिसमें लाखों की हेरा-फेरी होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
उसी तरह विगत 2021-22 तथा 2019-20 की नागरि सुविधा अंतर्गत बकाया 33% निधि लगभग 28 लाख रुपए की हेरा-फेरी किए जाने का भी आरोप गुणाराम मेहर ने लगाते हुए इसकी जांच हेतु दिनांक 01/03/2024 को मा. मुख्य कार्यपालन अधिकारी गोंदिया को उच्च स्तरीय जांच हेतु शिकायत पत्र प्रेषित किया है। परंतु अभी तक जांच नहीं होने से उन्होने शासन-प्रशासन पर नाराजी व्यक्त की है। उसी तरह सरपंच ने अपने हिटलरशाही के चलते पदस्थ ग्रामविकास अधिकारी व तत्कालीन खंडविकास अधिकारी तथा पंचायत विस्तार अधिकारी से साठगांठ कर अनेक मामलों में अपनी मनमानी किए जाने की बात पत्रकारों से चर्चा के दरमियान गुणाराम मेहर ने बताई हैं।
पत्रकार वार्ता में इस अवसर पर उनके साथ पिपरिया की पूर्व सरपंच तथा महिला भाजपा आघाड़ी तहसील प्रमुख सौ. मधु अग्रवाल,भाजपा पिपरिया शक्ति केंद्र प्रमुख धिरेंद्र अग्रवाल,ग्राम पंचायत सदस्य राजाराम धामड़े,किशोर उईके,अशोक उईके, सदस्या सौ. कुसमा चौरके, सौ. प्रिती कटरे एवं सरिता कोवे उपस्थित थे। पत्रकार वार्ता के दरमियान गुणाराम मेहर ने चेतावनी दी है कि यदि शासन-प्रशासन द्वारा उचित जांच कर कार्यवाही नहीं की गई तो वे आचार संहिता समाप्ति के पश्चात अपने ग्राम के सार्वजनिक चावड़ी में भूख हड़ताल करेंगे।