सामूहिक चेतना एवं समग्र क्रांति से समृद्धशाली समाज का निर्माण ही हमारा परम् लक्ष्य…! ( समग्र क्रांति की महत्वपूर्ण उपलब्धियों सहित) -इतिहासकार प्राचार्य ओ सी पटले

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♦️इतिहास से प्रेरणा लेकर वर्तमान को संवारना होगा, तभी हम ‌ समाज का उज्ज्वल भविष्य साकार कर पायेंगे और नयी पीढ़ी की राह भी आलोकित कर पायेंगे।
♦️पोवार समाज को विरासत में प्राप्त एक ‌स्वतंत्र मातृभाषा हैं । पोवारी संस्कृति को सनातन हिन्दू धर्म का अधिष्ठान प्राप्त होने से उसे विरासत में एक समृद्धशाली संस्कृति भी प्राप्त हुई है।
♦️पोवार समाज साहसी होने के कारण हर नये क्षेत्र में कदम रखने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहा है। इसलिए समाज का इतिहास भी समृद्धशाली एवं प्रेरणादायक है।
♦️पोवार समाज में सामूहिक चेतना विकसित करके समग्र क्रांति के माध्यम से समृद्धिशाली पोवार समाज का निर्माण यह हमारा लक्ष्य होने के कारण इन तीनों संकल्पनाओं को परिभाषित करना और तत्पश्चात पोवारी क्रांति द्वारा की विगत 6 वर्षों में प्राप्त की गयी उपलब्धियां रेखांकित करना स्पष्ट करना यह इस लेख का महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं।
1. सामूहिक चेतना का अभिप्राय एवं महत्व (Meaning and importance of collective consciousness )
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भारत की जाति प्रथा यहां की वास्तविकता है। यहां अलग-अलग जातियां है। लगभग सभी जातियों ने अपनी- अपनी स्वतंत्र मातृभाषा और संस्कृति( परंपराएं) विकसित की है। मातृभाषा ही संस्कृति की संवाहक होती है और सामाजिक एकता का अटूट बंधन होती है। उसी प्रकार प्रत्येक जाति की संस्कृति को सनातन हिन्दू धर्म का अधिष्ठान प्राप्त है। यह प्रत्येक जाति की वास्तविक स्थिति है।
अतः यदि हम अपने समुदाय के उत्थान के लिए उत्सुक हो तों हमें अपने समुदाय की ऐतिहासिक पहचान पर स्वाभिमान होना आवश्यक है ।उसी प्रकार मातृभाषा एवं सनातन हिन्दू धर्म के महत्व का ज्ञान होना चाहिए , इन दोनों तत्वों के प्रति प्रेम, अस्मिता , स्वाभिमान होना चाहिए और मन में उनके संरक्षण -संवर्धन का भाव भी प्रदीप्त होना आवश्यक है।
समाज के लोगों को समाजोत्थान संबंधित उपर्युक्त जानकारी अवगत होने को ही सामूहिक चेतना कहा जाता है। सामूहिक चेतना यह समाजोत्थान की बुनियादी शर्त है।
2. समग्र क्रांति का अभिप्राय (Meaning of the Total Revolution)
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प्रत्येक समाज के भाषिक, सामाजिक , सांस्कृतिक, साहित्यिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, राजनीतिक, आर्थिक, आदि विभिन्न पहलू होते है। समाज के सभी पहलुओं में पायी जाने वाली दुर्बलता को नष्ट कर उन पहलुओं का परिष्कार करना, इसे ही समग्र क्रांति के नाम से संबोधित किया जाता है। सत्यम् शिवम् सुंदरम् की आराधना से ही समग्र क्रांति के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है और समाज को समृद्धशाली बनाया जा सकता है।
3. समृद्धि का अभिप्राय एवं उसके विभिन्न पहलू (Meaning of Prosperity and it’s various aspects.)
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विकास का संबंध धन या भौतिक प्रगति से है। लेकिन समृद्धि का संबंध प्रेम,सौहार्द, संपदा, वैभव, वैचारिक विकास आध्यात्मिक विकास तथा खुशहाली से है। समृद्धि एक बहुआयामी संकल्पना है। इसके महत्वपूर्ण पहलू निम्नलिखित है –
(1) भाषिक समृद्धि – मातृभाषा के विकास को भाषिक समृद्धि कहा जाता है।
(2) साहित्यिक समृद्धि – प्रचूर मात्रा में मातृभाषा का उन्नत साहित्य निर्मित होने को साहित्यिक समृद्धि कहा जाता है।
(3) सामाजिक समृद्धि – सामाजिक समृद्धि में प्रेम, सौहार्द, खुशहाली का समावेश होता है।
(4) सांस्कृतिक समृद्धि- सांस्कृतिक समृद्धि में मातृभाषा, संस्कृति, संस्कार , त्यौहार, परंपराएं , जीवन-दर्शन एवं जीवनशैली का समावेश होता है।
(5) धार्मिक समृद्धि – धर्म में निहित कल्याणकारी विचारों को आत्मसात करने को धार्मिक समृद्धि कहा जाता है।
(6) आध्यात्मिक समृद्धि -अध्यात्म का संबंध मन के साथ होता है।अपने में परमसत्ता का जो अंश हैं,उसी को सृष्टि के प्रत्येक प्राणी में देखने को आध्यात्मिकता कहते हैं। आध्यात्मिक समृद्धि में आत्मसंयम एवं उदारता का समावेश होता है।
(7) वैचारिक समृद्धि- विचारों की प्रचुर मात्रा को वैचारिक समृद्धि कहा जाता है। इसमें मानव जीवन के पारिवारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक धार्मिक, आध्यात्मिक, राजनीतिक, इतिहास आदि विभिन्न पहलुओं संबंधी विचारों का समावेश होता है। वैचारिक समृद्धि नैतिक एवं कल्याणकारी विचारों पर निर्भर होती है।
(8) आर्थिक समृद्धि – आर्थिक समृद्धि का संबंध धन से होता है।इस प्रकार की समृद्धि को विकास कहा जाता है।
4.पोवारी भाषिक क्रांति (2018)
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पोवार समाज की युवाशक्ति,‌प्रबुद्ध जन एवं संपूर्ण जनमानस 2018 तक अपने समाज हित के लिए सामाजिक संगठनों पर आंखें बंद करके विश्वास कर रहा था। लेकिन सामाजिक संगठन समाज की मातृभाषा तथा पोवार समाज की ऐतिहासिक पहचान नष्ट करने के लिए प्रयत्नशील थें। इससे व्यथित होकर प्रस्तुत लेखक ने 2018 में पोवारी भाषिक क्रांति लाने का कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया और युवाशक्ति को अपने समुदाय के हितों की रक्षा के लिए संगठित होने का आवाहन किया। यह क्रांति युवाओं के प्रचंड प्रतिसाद के कारण आश्चर्यजनक गति से सफ़ल हुई। 5. समग्र क्रांति का सूत्रपात ————————————–
पोवारी भाषिक क्रांति के कारण समाज की युवाशक्ति में नई चेतना का संचार हुआ , समग्र क्रांति की पृष्ठभूमि तैयार हुई और देखते ही देखते क्रांति का सूत्रपात हुआ। 6. समग्र क्रांति की उपलब्धियां ——————————————
समग्र पोवारी क्रांति के कारण समाज में 2018 से अब तक जो क्रांतिकारी परिवर्तन अथवा महत्वपूर्ण सुधार हुऐ वें निम्नलिखित है-
6-1. समाज के तथाकथित कर्णधारों द्वारा समाज का परंपरागत ढांचा नष्ट करने के उद्देश्य से मातृभाषा पोवारी एवं पोवार समाज का ऐतिहासिक नाम बदला जा रहा है । पोवारी भाषिक क्रांति ने इस समस्या की ओर युवाशक्ति का ध्यान आकर्षित किया, युवाओं को समाज पर सोचने के लिए प्रेरित किया और उनमें समाज के प्रति कर्तव्य का भाव जगाया। परिणामस्वरुप जो व्यक्ति समाज का परंपरागत ढांचा नष्ट करने के लिए प्रयत्नशील थे उनके प्रति युवाओं में तीव्र आक्रोश उत्पन्न हुआ। उनके विरोध में युवाशक्ति संगठित हुई ।
6-2 . मातृभाषा पोवारी के संरक्षण – संवर्धन का कार्य संगठित रूप से प्रारंभ हुआ। शिक्षक, प्रोफेसर, वकील, डॉक्टर, प्रशासनिक अधिकारी,‌‌ उद्योजक, उन्नत किसान, नगर निवासी, आदि सभी व्यक्ति मातृभाषा पोवारी में बातचीत को लज्जा का नहीं बल्कि एक गर्व का विषय मानने लगे।
6-3.समाज के जो ‌व्यक्ति हिन्दी, मराठी अथवा झाड़ी बोली में साहित्य सृजन करते थे , वें पोवारी साहित्य की ओर मुड़े।मातृभाषा के प्रति स्वाभाविक प्रेम के समाज के अन्य अनेक युवा पोवारी साहित्य सृजन में रुचि लेने लगे।
6-4. पोवारी साहित्य सम्मेलनों का प्रारंभ हुआ। पोवारी साहित्य सृजन को गति मिली। पोवारी भाषा के संरक्षण – संवर्धन का कार्य सामूहिक रुप से प्रारंभ हुआ। मातृभाषा के अस्तित्व का संकट दूर हुआ।
6-5. पोवारी भाषा में सामाजिक संगठनों की निमंत्रण पत्रिकाओं का प्रारंभ हुआ। कार्यक्रमों में स्वाभिमान के साथ पोवारी का प्रयोग होने लगा। मंचों पर पोवारी लोकगीतों के प्रस्तुतिकरण को बढ़ावा मिला।‌
6-6. ऐतिहासिक पहचान, मातृभाषा पोवारी एवं पोवारी संस्कृति के संरक्षण – संवर्धन के लिए हिन्दू नव वर्ष की पावन तिथि को पोवारी भाषा दिन मनाने की परंपरा प्रचलित हुई।
6-7. यूट्यूब चैनल पर पोवारी गीतों एवं पोवारी कॉमेडी के माध्यम से पोवारी भाषा के प्रचार-प्रसार का कार्य प्रारंभ हुआ। 6-8.प्रस्तुत लेखक द्वारा पोवारी भाषा संवर्धन: मौलिक सिद्धांत व व्यवहार, समाजोत्थान का सिद्धांत एवं पोवारों का इतिहास (1758-2022) यह तीन उल्लेखनीय ग्रंथ प्रकाशित किए गये।यह तीनो ग्रंथ समाज के इतिहास में मील के पत्थर साबित होंगे।
6-9. ‌विभिन्न पोवारी साहित्यिकों द्वारा रचित पोवारी भाषा की पुस्तकें भारत सरकार द्वारा संचालित भारत वाणी नामक बहुभाषी परियोजना में सम्मिलित होने का दौर प्रारंभ हुआ। भारत वाणी एक बहुभाषी वेब पोर्टल है तथा इसका प्रधान कार्यालय मैसूर में है। इसके माध्यम से ‌पोवारी भाषा में निहित ज्ञान संसार को उपलब्ध होगा।
6-10.समाज में 2018 के पूर्व केवल चार- पांच व्यक्ति पोवारी साहित्य का सृजन करते थे एवं लगभग 10 पुस्तकों का प्रकाशन हुआ था। लेकिन विगत 6 वर्षों में (2018से अब-तक) साहित्यिकों की संख्या लगभग 100तक तथा पोवारी भाषा में प्रकाशित पुस्तकों की संख्या लगभग 70 तक पहुंच गई है। समग्र क्रांति की यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।
6-11. पोवारी साहित्य अब हिन्दी के पत्र- पत्रिकाओं में प्रतिष्ठित हो रहा है। उसी प्रकार पोवारी की कविताएं और गीत हिंदी और मराठी साहित्यिक मंचों पर प्रस्तुत किए जा रहे हैं।
6-12.न्यूज प्रभात डिजिटल न्यूज़ पेपर के संपादक श्री सुनील तुरकर जी ने 2020 से पोवारी साहित्य के प्रचार-प्रसार में योगदान देना प्रारंभ किया। डिजिटल न्यूज़ पेपर में पोवारी भाषा के प्रचार- प्रसार का प्रारंभ यह एक अभुतपूर्व ऐतिहासिक घटना थी। सुनील जी का नाम पोवारी भाषा एवं साहित्य के इतिहास में अब अमिट रुप से अंकित हो गया है। उनका यह योगदान सुखती हुई फसल को की ‌जा रहीं सिंचाई में योगदान देने के समान महत्वपूर्ण एवं अविस्मरणीय है।
6-13. इस वर्ष मंग. 7 मई 2024 से साप्ताहिक गोंदिया टाइम्स पोवार दर्पण का प्रकाशन प्रारंभ हुआ हैं। विश्वास है कि यह साप्ताहिक समग्र पोवारी क्रांति को अधिक ऊंचाई पर पहुंचायेगा एवं अधिक व्यापक बनायेगा।
7.उपसंहार
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हमारे समाज के कुछ तथाकथित कर्णधारों ने 1965 में पोवार समाज का स्वतंत्र अस्तित्व नष्ट करने का प्रयास में प्रारंभ किया । इन्हीं महानुभावों के कुछ अनुयायियों द्वारा पोवार समाज एवं मातृभाषा पोवारी का परंपरागत नाम मिटाने का अनुचित प्रयास1998 में प्रारम्भ किया ‌गया है। इस कारण पोवार समाज एवं मातृभाषा पोवारी के सम्मुख अस्तित्व का संकट उपस्थित हुआ।
अतः हमने 2018 में पोवार समाज की ऐतिहासिक पहचान को कायम रखते हुए समाज एवं मातृभाषा के उत्थान का दृढ़ संकल्प लिया है। सामूहिक चेतना एवं समग्र क्रांति के माध्यम से समाज को समृद्धि के ऊंचे शिखर पर पहुंचाना हमारा परम् लक्ष्य है।
-ओ सी पटले
सामूहिक चेतना एवं समग्र क्रांति अभियान, भारतवर्ष.
बुध.15/5/2024.
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