मातृभाषा पोवारी: पोवार समुदाय की आधारशिला

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1.मातृभाषा को महत्व
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आधुनिक युग मा अनेक मातृभाषा संकटग्रस्त सेती. मातृभाषा पोवारी पर भी संकट का बादल मंडराय रहया सेत. असों महत्वपूर्ण कालखंड मा प्रत्येक व्यक्ति न् दूय मौलिक प्रश्नों पर आत्मचिंतन करन की आवश्यकता से, वय प्रश्न निम्नलिखित सेत –

मातृभाषा पोवारी यदि मरें त्
पोवारी संस्कृति कसी कायम रहें?
पोवारी संस्कृति यदि खोय जायें त् पोवार समाज को स्वतंत्र अस्तित्व कसो कायम रहे?

उपर्युक्त प्रश्न प्रस्तुत लेखक को मन मा बार-बार उत्पन्न होसेत. दूही प्रश्नों पर गंभीरता लक विचार करनो पर या बात स्पष्ट होसे कि मातृभाषा की आधारशिला पर संस्कृति व समाज को शामियाना उभो से. मातृभाषा नष्ट होये त् येव शामियाना धरायाई होनो सुनिश्चित से. अतः मातृभाषा को संरक्षण व संवर्धन करनो या वर्तमान युग की बुनियादी आवश्यकता से.मातृभाषा पोवारी को संरक्षण, संवर्धन येन् मुद्दा पर सैद्धांतिक दृष्टि लक प्रत्येक व्यक्ति आपली सम्मति दर्शावत भी देखेव जासे.
मातृभाषा को संरक्षण – संवर्धन को उपायों की गहराई मा न जाता यहां येतरोच कव्हनो चाहूं कि मातृभाषा को महत्व ध्यान मा ठेयकर आम्हीं आपलो समुदाय को प्रत्येक आभासी समूह मा यदि प्रतिदिन कमसे कम 25 प्रतिशत समय मातृभाषा पोवारी की पोस्ट प्रेषित करन , विचारों को आदान -प्रदान,आपसी बातचीत अना प्रश्न -उत्तर मा खर्च करन की नीति अपनायके कार्य करबीन त् बहुत अच्छों होतो. या नीति अपनायेव लक आम्हीं आपलो समाज को जड़ों सीन जुड़ेव रव्हनो संभव होये.
2.पोवार समुदाय को शाश्वत हित
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जमीनी हकीकत से कि सदियों पासून वैनगंगा अंचल को पोवार समुदाय एक विशेष जाति को रुप मा अस्तित्व मा से. सजातीय विवाह प्रथा पोवार समुदाय की विशेषता से. पोवार समुदाय की एक विशेष मातृभाषा, संस्कृति, परंपरा, पहचान व इतिहास से. ये पांच ही तत्व नवीन पीढ़ी ला समाज की जड़ों सीन जोड़न को कार्य कर् सेत. अतः यदि आमला पोवार समाज को स्वतंत्र अस्तित्व कायम ठेवनो से त् वोको जड़ों सीन जोड़नेवालो सभी तत्वों को संरक्षण- संवर्धन करनो अनिवार्य से. अन्यथा पोवार समुदाय की संपूर्ण संरचना तहस – नहस होय जायें अथवा अस्तित्व समाप्त होय जायें.पोवार समुदाय का लोग अलग- अलग पहचान धारण कर लेयेती व वसुंधरा पर पोवार समुदाय विलुप्त हो जाये.
अतः जाहिर आवाहन से कि, आओं युवा साथियों! आम्हीं निष्ठापूर्वक आपली मातृभाषा, संस्कृति, परंपरा अना पहचान को संरक्षण – संवर्धन करबी. येको माच आमरो पोवार समुदाय की एकता, सुख-शांति,भलाई अना शाश्वत कल्याण से.
3. मातृभाषा : समाज की आत्मा
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मातृभाषा को बुनियाद पर समाज की संस्कृति, पहचान, इतिहास व अस्तित्व निर्भर से. अतः मातृभाषा ला समाज की आत्मा को रुप परिभाषित करेव जासे . सामाजिक संगठन व पोवार समाज को हितचिंतकों द्वारा मातृभाषा पोवारी को संरक्षण, संवर्धन व उत्कर्ष पर लक्ष केंद्रित करनो,या वर्तमान युग की प्रथम आवश्यकता से.मातृभाषा या माय, माटी व स्वयं को अस्तित्व वानी महत्वपूर्ण से.अत: युवाओं ला मातृभाषा को संरक्षण- संवर्धन साती आवाहन करती एक भावपूर्ण कविता निम्नलिखित से –

।।स्वर गूंजन देव मातृभाषा को ।।
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युवा साथियों!सुनो सुनो
मातृभाषा पोवारी मा बोलों।
मातृभाषा की ऊंची उड़ान साती,
पुनः स्वर गूंजन देव मातृभाषा को।।

गाठ आपलो मन की खोलों ।
लाज शरम अहंकार छोड़ो।
मातृभाषा मा बहार आनन साती,
पुनः स्वर गूंजन देव‌ मातृभाषा को।।

संस्कृति को संरक्षण साती
मातृभाषा पोवारी मा बोलों।
संस्कृति मा हरियाली आनन साती,
पुनः स्वर गूंजन देव‌ मातृभाषा को।।

समाज को एकता साती
मातृभाषा पोवारी मा बोलों।
एकता मा बहार आनन साती,
पुनः स्वर गूंजन देव मातृभाषा को।।

पहचान बचावन साती
मातृभाषा पोवारी मा बोलों।
पहचान को सौरभ फैलावन साती,
पुनः स्वर गूंजन देव मातृभाषा को।।

समाज को अस्तित्व साती
मातृभाषा पोवारी मा बोलों।
समाज ला जड़ों सीन जोड़न साती,
पुनः स्वर गूंजन देव‌ मातृभाषा को।।

-इतिहासकार प्राचार्य ओ सी पटले
प्रणेता: पोवारी भाषिक, सामाजिक, वैचारिक क्रांति अभियान, भारतवर्ष.
रविवार6/7/2025.
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