

▪️अखिल भारतीय क्षत्रिय पोवार (पंवार) महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुन्नालाल जी राहंगडाले ने वरिष्ठ साहित्यकार श्री ओंकारलाल जी पटले से की मुलाकात
महासंघ का जनसंपर्क एवं ऐतिहासिक धरोहर के प्रति प्रेम तथा अस्मिता जगाओ अभियान ने पकड़ी गति
राष्ट्रीय संस्था “अखिल भारतीय क्षत्रिय पोवार (पंवार) महासंघ” के नव-नियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुन्नालाल जी राहंगडाले ने समाज के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अपने सतत ‘जनसंपर्क एवं ऐतिहासिक धरोहर के प्रति प्रेम तथा अस्मिता जगाओ अभियान’ के तहत, उन्होंने दिनांक 10 नवम्बर को समाज के प्रख्यात इतिहासकार, पोवारी, हिंदी और मराठी भाषा के वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि, सेवानिवृत्त प्राचार्य तथा महासंघ के संरक्षक श्री ओंकारलाल जी पटले से सौजन्य भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
वरिष्ठ साहित्यकार का अतुलनीय योगदान : यह मुलाकात विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही क्योंकि दोनों सामाजिक चिंतकों ने समाज के सामाजिक और सांस्कृतिक उत्थान से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक चर्चा की।
▪️पोवारी भाषा का प्रचारक: श्री ओंकारलाल जी पटले ने पोवारी, हिंदी और मराठी भाषाओं में लगभग बीस ग्रंथों की रचना की है। उनका सबसे अमूल्य कार्य पोवारी भाषा को जन-जन तक पहुँचाना रहा है।
▪️”पोवारी भाषिक क्रांति”: उन्होंने वर्ष 2018 से “पोवारी भाषिक क्रांति” का शुभारंभ कर समाज की मातृभाषा के संरक्षण और प्रसार का एक सशक्त आंदोलन चलाया है, जो समाज की भाषाई पहचान को मजबूत कर रहा है।
छत्तीस कुलीन संस्कृति और सनातनी पहचान का संरक्षण :चर्चा के दौरान, समाज के इतिहास, छत्तीस कुलीन सामाजिक-सांस्कृतिक उत्थान, पोवारी भाषा के प्रचार-प्रसार तथा छत्तीस कुलीन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
दोनों समाजसेवियों ने यह सर्वसम्मति से स्वीकार किया कि:
“समाज के वास्तविक इतिहास और पोवारी सनातनी संस्कृति का संरक्षण आज के युग की एक अत्यंत आवश्यक आवश्यकता है।
यह महासंघ अपने पूर्ववर्ती संगठनों की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, छत्तीस कुलीन पहचान को अक्षुण्ण रखने और मालवा तथा मध्य भारत की गौरवगाथा को जन-जन तक पहुँचाने का निरंतर प्रयास कर रहा है।
325 वर्षों का स्वाभिमानपूर्ण इतिहास : क्षत्रिय पोवार (पंवार) समाज के लिए मध्य भारत का इतिहास अत्यंत महत्वपूर्ण है। मध्य भारत में पिछले 325 वर्षों का स्वाभिमानपूर्ण इतिहास समाज की अस्मिता का एक अमूल्य अध्याय है।
▪️ऐतिहासिक धरोहर: मध्य भारत में आने के पश्चात् हमारे पूर्वजों ने नगरधन (रामटेक) में लगभग तीन सौ पच्चीस वर्ष पूर्व “क्षत्रिय पोवार (पंवार) संघ” की स्थापना की थी।
▪️ मूल उद्देश्य की पूर्ति: महासंघ आज भी उसी मूल उद्देश्य के अनुरूप अपनी छत्तीस कुलीन पोवारी संस्कृति के संरक्षण हेतु निरंतर कार्यरत है।
▪️युवाओं में चेतना: यह संस्था युवाओं को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपरा से जोड़ते हुए उनमें स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना जागृत करने का सतत प्रयास कर रही है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष का सतत जनसंपर्क अभियान : राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुन्नालाल जी राहंगडाले का यह सतत जनसंपर्क अभियान संगठन की सक्रियता को नई ऊर्जा प्रदान करने के साथ-साथ, समाज के इतिहास, संस्कृति, भाषा और एकता के संरक्षण एवं संवर्धन को अभूतपूर्व गति देगा।
निश्चित ही, क्षत्रिय पोवार (पंवार) समाज अपने इस समर्पित प्रयास के माध्यम से समाज के उत्थान के साथ-साथ राष्ट्र के विकास, सनातनी संस्कृति के संवर्धन और सामाजिक एकता की भावना को सशक्त बनाने में निरंतर अग्रसर रहेगा।
भवदीय,
खुशाल कटरे
राष्ट्रीय महासचिव
अखिल भारतीय क्षत्रिय पोवार (पंवार) महासंघ






