

गोंदिया : जी.ई.एस. जूनियर कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंस, कामठा में महासमाधि धारक परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित और परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज और मुनि श्री भाव सागर जी महाराज का मंगल प्रवेश हुआ। कॉलेज स्टाफ ने श्रद्धापूर्वक श्रीफल अर्पण कर मुनिद्वय का स्वागत किया।
इस अवसर पर आयोजित धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री भाव सागर जी महाराज ने छात्रों को उनके जीवन में सफलता और सकारात्मकता के लिए महत्वपूर्ण संदेश दिए:
सफलता के लिए मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के प्रमुख संदेश:
▪️ ब्रह्म मुहूर्त में पढ़ाई का महत्व: मुनि श्री ने बच्चों को ब्रह्म मुहूर्त (सुबह जल्दी) में अध्ययन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इससे बुद्धि अच्छी होती है और पढ़ी हुई बातें जल्दी याद हो जाती हैं।
▪️आइंस्टीन का फार्मूला और अग्रिम सोच: उन्होंने छात्रों को आइंस्टीन के फार्मूले को याद करके पढ़ाई में आगे निकलने के लिए प्रेरित किया।
▪️ नशा एक अभिशाप: मुनि श्री ने छात्रों को नशे से दूर रहने की कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “नशा शरीर, धन, जीवन सभी का नाश कर देता है।”
▪️ ‘ओम’ की शक्ति: उन्होंने बताया कि ‘ओम’ ब्रह्मांड का सबसे पावरफुल अक्षर है।
▪️सकारात्मक वातावरण: पढ़ाई करते समय अच्छे वातावरण को महत्वपूर्ण बताया।
▪️ आत्महत्या से दूर रहने का संकल्प: मुनि श्री ने सभी से कभी भी आत्महत्या न करने का संकल्प लेने का आग्रह किया।
▪️ असफलता में सफलता: उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि असफलता में भी सफलता छुपी होती है और “इंपॉसिबल” (Impossible) में भी “आई एम पॉसिबल” (I Am Possible) लिखा होता है।
▪️ छात्र जीवन की नींव: मुनि श्री ने कहा कि स्टूडेंट का जीवन सबसे महत्वपूर्ण जीवन होता है, क्योंकि यहीं से पूरे जीवन की नींव शुरू होती है।
मुनि श्री भाव सागर जी महाराज ने यह भी कहा कि, “जीत हो या हार, हमेशा तैयार रहो। पढ़ाई हो या इंटरव्यू, नए तरीके से हम परिवर्तित होकर आगे बढ़ सकते हैं।” यह प्रेरणादायक संदेश कॉलेज के स्टाफ और छात्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा!






