संसद के शीतकालीन सत्र में ‘पूर्व सांसद महादेवराव शिवणकर ‘ को भूला सदन ?

0
1260
1

दिवंगत सांसद महादेवराव शिवणकर को श्रद्धांजलि न मिलने पर गोंदिया-भंडारा में रोष

 

नई दिल्ली / गोंदिया : भारतीय संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन, दिनांक १ दिसंबर को, लोकसभा की कार्यवाही में हुई एक अप्रत्याशित और गंभीर चूक ने महाराष्ट्र के गोंदिया-भंडारा क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। सदन में दिवंगत पूर्व सांसदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने की गरिमामयी परंपरा के बीच, इस क्षेत्र के कद्दावर नेता, दो बार के सांसद, किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और महाराष्ट्र सरकार में पूर्व केंद्रीय वितमंत्री रहे प्रा. महादेवराव शिवणकर का नाम श्रद्धांजलि सूची से नदारद रहा।

 

इससे भी बड़ा प्रश्न यह है कि स्वयं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्वर्गीय शिवणकर (निधन: २० अक्टूबर २०२५) के चिरंजीव विजय शिवणकर को २३ अक्टूबर २०२५ को शोक-पत्र भेजा था, जिसका अर्थ है कि अध्यक्ष महोदय को उनके निधन की सूचना थी। इसके बावजूद, सदन में उनके नाम का उल्लेख न होना इस घटना को केवल ‘चूक’ नहीं, बल्कि ‘घोर अवहेलना’ सिद्ध करता है, जिससे उनके गृह क्षेत्र में तीव्र निराशा और भारी रोष व्याप्त है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही आरंभ करते हुए देश और समाज में योगदान देने वाले पाँच पूर्व सहयोगियों के निधन पर शोक व्यक्त किया।
संसद टी.व्ही. पर उपलब्ध सत्र की लाइव रिकॉर्डिंग में, अध्यक्ष महोदय ने कर्नल सोनाराम चौधरी, प्रोफेसर विजय कुमार मल्होत्रा, रवि नायक, प्रकाश जायसवाल और अभिनेता धर्मेंद्र जैसे पूर्व सांसदों के नाम पढ़े।
लेकिन स्वर्गीय प्रा. महादेवराव शिवणकर, जिनका  संसदीय जीवन दो अवधियों (1989-1991 और 2004-2009) तक फैला रहा, और जो महाराष्ट्र की राजनीति में केंद्रीय वित्त मंत्री के रूप में भी सक्रिय थे,उनका नाम इस सम्मान सूची में शामिल नहीं किया गया।
स्थानीय जनता का सवाल सीधा है: जब लोकसभा अध्यक्ष ने स्वयं शोक-पत्र भेजा था, तो यह तकनीकी चूक कैसे हुई? यह गोंदिया-भंडारा के लोगों के लिए अत्यंत पीड़ादायक है, क्योंकि यह उनके लोकप्रिय नेता के योगदान को राष्ट्रीय मंच पर जानबूझकर नज़रअंदाज़ करने जैसा प्रतीत होता है।
कौन थे प्रा. महादेव राव शिवणकर ? : दिवंगत प्रा. महादेवराव शिवणकर केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे किसानों और क्षेत्रीय विकास के प्रतीक थे:
▪️ दो बार लोकसभा सदस्य: वे नवमी (1989-1991) और चौदहवी (2004-2009) चिमूर लोकसभा क्षेत्र के सदस्य रहे।
▪️ किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष: किसानों के मुद्दों को राष्ट्रीय पटल पर पहुँचाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी।
▪️ पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री (महाराष्ट्र): राज्य शासन में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि संसद में श्रद्धांजलि देना देश की सेवा करने वाले एक दिवंगत सदस्य के योगदान को स्वीकार करने का सर्वोच्च तरीका है। इस चूक के सामने आने के बाद, गोंदिया और भंडारा जिले के लोग अपनी नाराज़गी व्यक्त करते हुए कह रहे हैं:
▪️उचित सम्मान से वंचित: दो बार के सांसद और केंद्रीय मंत्री रहे नेता को श्रद्धांजलि सूची से बाहर रखना सर्वथा अनुचित है।
▪️ क्षेत्रीय उपेक्षा: एक बड़े नेता के बहुआयामी योगदान को राष्ट्रीय मंच पर इस प्रकार नज़रअंदाज़ करना, क्षेत्रीय जनता की भावनाओं को गहरा ठेस पहुँचाता है और उनमें उपेक्षा का भाव पैदा करता है।
जनता अब एक स्वर में यह मांग कर रही है कि लोकसभा अध्यक्ष को इस गंभीर त्रुटि पर अविलंब संज्ञान लेना चाहिए और सदन की अगली बैठक में दिवंगत प्रा. महादेव राव शिवणकर को विधिवत श्रद्धांजलि अर्पित करनी चाहिए, ताकि गोंदिया-भंडारा क्षेत्र की जनता की भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित हो सके।

Previous articleगोंदिया व तिरोडा नगरपरिषद निवडणुकांसाठी सुधारित कार्यक्रम जाहीर
Next articleहायवे पोलीस व विद्यार्थ्यांसोबत साजरा झाला राहुल दुबाले यांचा वाढदिवस